हमारे बारे में

स्काई हेल्प ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना
स्काई हेल्प ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना वर्ष 2015 में समाज और प्रकृति की सेवा के संकल्प के साथ की गई। यह संगठन एक भारतीय विकास संस्था है, जिसका मूल उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, सामाजिक समानता और मानवीय उत्थान के लिए सतत प्रयास करना है। संस्थान का विश्वास है कि जब तक धरती हरी-भरी नहीं होगी, तब तक मानव जीवन सुरक्षित नहीं रह सकता। इसलिए हमारी प्रमुख कार्यधारा पर्यावरण और वृक्षारोपण के माध्यम से धरती को हराभरा बनाना, प्रदूषण को कम करना और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटना है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ स्वस्थ, सुरक्षित और सुखमय जीवन जी सकें।
किन्नर समाज के लिए कार्य
सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, स्काई हेल्प ऑर्गेनाइजेशन ने किन्नर समाज के लिए भी ऐतिहासिक कार्य किए हैं। वर्ष 2016 में संगठन ने “किन्नर अखाड़ा” का गठन कर किन्नर समाज को धर्म और आध्यात्मिक क्षेत्र में एक सम्मानजनक स्थान दिलाया। आज किन्नर अखाड़ा न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में सनातन धर्म की धारा में एक प्रमुख अंग बन चुका है। यह समाज को यह संदेश देता है कि प्रत्येक प्राणी, चाहे उसकी सामाजिक स्थिति कुछ भी हो, ईश्वर की सृष्टि का अभिन्न अंग है और उसे धर्म में समान स्थान मिलना चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण
हमारा संगठन मानता है कि – “जंगल है तो जल है, और जल है तो जीवन है।”
इसी सोच के साथ हम निरंतर वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के कार्य कर रहे हैं।
हमारे प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल हैं –
वृक्षारोपण अभियान – अधिक से अधिक पेड़ लगाकर हरे-भरे वन तैयार करना।
पर्यावरण जागरूकता – लोगों में प्रकृति संरक्षण की भावना जगाना और उन्हें हरियाली के महत्व से जोड़ना।
जल संरक्षण – तालाब, कुएँ, वर्षा जल संग्रहण और नदियों की रक्षा के लिए प्रयास करना।
जैव विविधता का संरक्षण – पक्षियों, जीव-जंतुओं और प्राकृतिक आवास की रक्षा करना।
प्रदूषण रोकथाम – प्लास्टिक मुक्त वातावरण और स्वच्छ ऊर्जा का प्रचार करना।
मिट्टी और भूजल की रक्षा – पेड़ों की जड़ों से मिट्टी के कटाव को रोकना और भूजल स्तर को बढ़ाना।
नर्मदा तट पर विशेष पहल
स्काई हेल्प ऑर्गेनाइजेशन ने अपने कार्य की शुरुआत माँ नर्मदा तट से की। संस्थापक श्री दुर्गा दास चड़ोकार जी ने माँ नर्मदा की परिक्रमा के दौरान यह अनुभव किया कि यदि नदी के तट पर वृक्ष लगाए जाएँ तो न केवल नर्मदा जी की रक्षा होगी बल्कि तटों का कटाव भी रुकेगा और जंगल पुनः जीवित हो सकेंगे।
आज संगठन नर्मदा तट के तीन राज्यों में सैकड़ों गाँवों और शहरी बस्तियों के साथ मिलकर वृक्षारोपण और पर्यावरण बचाने का अभियान चला रहा है। यह प्रयास केवल वृक्ष लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नर्मदा के तटों को स्थिर बनाना, वहाँ की जैव विविधता को संरक्षित करना और स्थानीय समाज को इस पवित्र कार्य से जोड़ना भी है।
ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती
आज पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से जूझ रहा है। तापमान में निरंतर वृद्धि, जलवायु परिवर्तन, सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएँ इसके प्रत्यक्ष परिणाम हैं। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए स्काई हेल्प ऑर्गेनाइजेशन ठोस कदम उठा रहा है। वृक्षारोपण, प्रदूषण रोकथाम और जल संरक्षण जैसे कार्य हमारी प्राथमिकता हैं। हम मानते हैं कि स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास वैश्विक स्तर पर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।
हमारी स्थापना की यात्रा
2015 में कुछ उत्साही मित्रों का एक समूह समाज और प्रकृति को कुछ लौटाने की भावना से एकत्र हुआ। इस विचार को आकार दिया संस्थापक श्री दुर्गा दास चड़ोकार ने। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से संगठन की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे यह एक सशक्त सामाजिक संस्था में परिवर्तित हो गया।
संस्थापक का मानना है कि –
“सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और प्रकृति की सेवा मानवता की सर्वोच्च सेवा है।”
यही कारण है कि स्काई हेल्प ऑर्गेनाइजेशन हर उस दिशा में कार्यरत है जहाँ समाज और प्रकृति की रक्षा और उत्थान हो सके।
हमारी कार्यशैली
हमारा संगठन सिर्फ सैद्धांतिक बातें नहीं करता, बल्कि ज़मीन पर जाकर काम करता है। चुनौतियों का सामना करते हुए भी हम निरंतर नए प्रयोग करते हैं –
समाज और प्रकृति की समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास।
प्रबंधन सिद्धांतों का प्रयोग करते हुए योजनाओं को सफल बनाना।
स्थानीय लोगों को जोड़कर नागरिक संचालित परिवर्तन की अवधारणा को बढ़ावा देना।
सेवाओं और संसाधनों को जोड़कर स्थायी विकास का मार्ग बनाना।
सेवा का भाव और सनातन संस्कृति
भारतीय संस्कृति में सेवा का भाव सदियों से रचा-बसा है। सनातन धर्म में सेवा को धर्म का सार माना गया है। प्राणी मात्र की सेवा और प्रकृति की रक्षा को पूजा का हिस्सा समझा गया है। मानव की सेवा को भगवान की सेवा के समान बताया गया है।
यह विश्वास हमें निरंतर प्रेरित करता है कि –
सेवा ही मानव जीवन का वास्तविक सौंदर्य है।
सेवा से ही जीवन में पूर्णता आती है।
सेवा के बिना कोई भी समाज या संस्कृति स्थायी नहीं हो सकती।
सनातन धर्म की यही सीख स्काई हेल्प ऑर्गेनाइजेशन की आत्मा है। हम कर्म की प्रधानता में विश्वास करते हैं और मानते हैं कि मनुष्य को वही फल मिलता है जो वह कर्म करता है। उसके कर्मों का प्रभाव केवल उस पर ही नहीं, बल्कि पूरी प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है। इसलिए हमारा दायित्व है कि हम प्रकृति और उसके सभी जीवों की रक्षा करें।
हमारी प्रतिबद्धता
स्काई हेल्प ऑर्गेनाइजेशन एक ऐसा परिवार है जिसमें समाज और प्रकृति दोनों की भलाई के लिए कार्य करना सर्वोच्च कर्तव्य माना जाता है। हमारा नारा है –
“जंगल – जल – जीवन” (जंगल है तो जल है, जल है तो जीवन है)
हमारी सेवाएँ –
सेवाओं की सेवा
प्रकृति की सेवा
मानवता की सेवा
निष्कर्ष
आज स्काई हेल्प ऑर्गेनाइजेशन एक स्थायी भारतीय सामाजिक संस्था के रूप में विकसित हो चुका है। हमने अपने छोटे-छोटे कदमों से बड़ा सफर तय किया है। हमारे प्रयासों ने समाज और पर्यावरण को जोड़ने का कार्य किया है।
हमारा सपना है कि –
धरती हरी-भरी हो,
नदियाँ निर्मल बहें,
समाज में समानता और भाईचारा हो,
और आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित भविष्य पा सकें।
हम जानते हैं कि यह मार्ग कठिन है, लेकिन हमें विश्वास है कि सेवा और संकल्प से सबकुछ संभव है।
स्काई हेल्प ऑर्गेनाइजेशन – सेवाओं की सेवा, प्रकृति की सेवा, मानवता की सेवा।